November 24, 2017

फिर वही दर्द है-अपराधी कौन १९५७

मास्टरपीस क्या होता है इस गीत को सुन कर जानिए. सैटायर का
पुट है इस गीत में. गीतकार क्या लिखना चाहता है और उससे
फिल्मवाले क्या लिखवाते हैं उसमें बड़ा फर्क होता है. हाँ, बीच बीच
में वो अपनी लेखनी का कमाल दिखला ही जाता है चुपके से.

गायकी मन्ना डे ने जितनी आसान बनाई उतनी शायद किसी ने
सपने में भी ना सोची होगी. सलिल चौधरी भी एक कमाल के
संगीतकार थे. सभी विधाओं में पारंगत. उन्हें कोम्प्लेक्स किस्म की
ध्वनियाँ ज्यादा प्रिय थीं. मजे कि बात ये है वो सारा कोम्प्लेक्स
मिक्सचर सुनने में बड़ा ही सरल मालूम पड़ता.

आप चाहे जो समझ लें मगर किसी हास्य गीत को फिल्माना आसान
काम नहीं होता, जब उसे सोबर भी रखना हो और ये भी कि वो
कहीं बोर ना बन जाए. असरार हसन खान उर्फ मजरूह साहब ने
अपना कलम वाला नाम मजरूह(जिसका अर्थ है-hurt, smitten).
उनकी सबसे बड़ी खूबी थी प्रासंगिक बने रहना.

उनके ऊपर एक अच्छा आलेख इधर है-अक्षय मनवानी की नज़र 
में मजरूह. अक्षय ने मजरूह के पॉपुलर गीत सुन कर ये सब लिखा है
या फिर वे क्या कहना चाहते हैं उसके उदाहरण देने के लिए उन्होंने
पॉपुलर गीत ही चुने, खैर जो भी मसला हो, आर्टिकल अच्छा है और
उसमें मजरूह की लेखनी के लगभग सारे पहलू उन्होंने कवर कर लिए
हैं. उन्हें, मगर, मजरूह के, अभी और भी गीत सुनने की आवश्यकता है.




गीत के बोल:

फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर
हम समझे गम कर गया सफर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर
फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर
हम समझे गम कर गया सफर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर

हम तो समझे दुश्मनों का हाथ कट गया
दो दिलों के बीच से पहाड़ हट गया
हम तो समझे दुश्मनों का हाथ कट गया
दो दिलों के बीच से पहाड़ हट गया
गम के भारी दिन गए गुजर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर
फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर

तू दुल्हन बनेगी और छेड़ेगी रागिनी
तू दुल्हन बनेगी और छेड़ेगी रागिनी
आई प्यार के मधुर मिलन की चांदनी
तू दुल्हन बनेगी और छेड़ेगी रागिनी
आई प्यार के मधुर मिलन की चांदनी
लेकिन थोड़ी रह गयी कसर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर

फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर
हम समझे गम कर गया असर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर

मैंने चाहा भूल जाऊं क्यूँ रहूँ खराब
पर तेरा ये हुस्न जैसे दाल में गुलाब
मैंने चाहा भूल जाऊं क्यूँ रहूँ खराब
पर तेरा ये हुस्न जैसे दाल में गुलाब
थोडा थोडा है वही असर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर

फिर वही दर्द है फिर वही जिगर
फिर वही रात है फिर वही है डर
हम समझे गम कर गया सफर
द्वार दिल का खुल गया
हाथी निकल गया
दुम रह गयी मगर
.....................................................................
Phir wahi dard hai-Apradhi Kaun 1957

Artists: Dhumal, Kumud Tripathi, Lilian

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November 23, 2017

चोर तेरा नाम है-जागीर १९८४

एक युगल गीत सुनते हैं लता मंगेशकर और किशोर कुमार की
आवाजों में. फिल्म जागीर का ये गीत मिथुन और शोमा आनंद
पर फिल्माया गया है. गीत है आनंद बक्षी का और इसका संगीत
आर डी बर्मन की देन है.

फिल्म की शुरुआत में घोड़े दौडाने के समय बजाय जाने वाला
संगीत है और घोड़े की हिनहिनाहट भी है. नायिका और घोडा दोनों
ही तंदुरुस्त हैं. तंदुरुस्त नायिकाओं वाली फ़िल्में दक्षिण भारत
में बहुतायत में हैं. नयी पीढ़ी की नायिकाओं में ज़रूर कुछ
छरहरी काया वाली तारिकाएं दिखती हैं.



गीत के बोल:

चोर तेरा नाम है चितचोर तेरा नाम है
चोर तेरा नाम है चितचोर तेरा नाम है
हो नींद चुराना चैन उड़ाना ये तो तेरा काम है
चोर तेरा नाम है चितचोर तेरा नाम है
हो नींद चुराना चैन उड़ाना ये तो तेरा काम है

आहिस्ता आहिस्ता चुपके चुपके चोरी चोरी
आहिस्ता आहिस्ता चुपके चुपके चोरी चोरी
मेरे मन पे फेंकी तूने ये नैनों की डोरी
मेरी तौबा मेरे सर पे झूठा ये इलज़ाम है

अरे चोर तेरा नाम है चितचोर तेरा नाम है
हो नींद चुराना चैन उड़ाना ये तो तेरा काम है
चोर तेरा नाम है चितचोर तेरा नाम है

तेरी आँखें तेरी बातें तेरी जुल्फें तौबा
तेरी आँखें तेरी बातें तेरी जुल्फें तौबा
अरे प्यार करेगा जो तुझको कैसे पागल ना होगा
पागल प्रेमी प्रेम है पापी रूप यूँ ही बदनाम है

अरे चोर तेरा नाम है चितचोर तेरा नाम है
हो नींद चुराना चैन उड़ाना ये तो तेरा काम है
चोर तेरा नाम है चितचोर तेरा नाम है

अरे किसने की चोरी बरजोरी मुश्किल है ये कहना
अरे इस हालत में कुछ कहने से अच्छा है चुप रहना
कुछ ना कहना यूँ चुप रहना प्यार भरा पैगाम है

अरे चोर तेरा नाम है चितचोर तेरा नाम है
हो नींद चुराना चैन उड़ाना ये तो तेरा काम है
चोर तेरा नाम है चितचोर तेरा नाम है
.........................................................................
Chor tera naam hai-Jaagir 1984

Artists: Mithun Chakravorty, Shoma Anand

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November 22, 2017

ये इश्क है क्या-गोपी किशन १९९४

आनंद मिलिंद और समीर की जुगलबंदी वाला एक मधुर गीत
सुनिए सन १९९४ की फिल्म गोपी किशन से. अलका याग्निक
और कुमार सानू  ने इस युगल गीत को गाया है.

प्रस्तुत गीत का फिल्मांकन बढ़िया है. इसे करिश्मा कपूर और
सुनील शेट्टी पर फिल्माया गया है. फिल्म में सुनील शेट्टी की
दोहरी भूमिका है.




गीत के बोल:

ये इश्क है क्या इक रोग बुरा
ये इश्क है क्या इक रोग बुरा
ना भूख लगे ना प्यास लगे
कोई दर्द हो सह लेना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
ये इश्क है क्या इक रोग बुरा
ये इश्क है क्या इक रोग बुरा
ना भूख लगे ना प्यास लगे
कोई दर्द हो सह लेना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना

दिल में करार नहीं नींद गयी आँखों से
मुझको तो बाँध लिया प्यार की सलाखों ने
दिल में करार नहीं नींद गयी आँखों से
मुझको तो बाँध लिया प्यार की सलाखों ने
अब ना जी लागे क्या होगा आगे
कटती ना रातें झूठी है बातें
सारे दुखों की साथी यही है दवा

ये इश्क है क्या इक रोग बुरा
ये इश्क है क्या हो इक रोग बुरा
ना भूख लगे ना प्यास लगे
कोई दर्द हो सह लेना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना

कहते हैं लोग मुझे ये बड़ी दीवानी है
चाहतों के नाम मेरी सारी जिंदगानी है
कहते हैं लोग मुझे ये बड़ी दीवानी है
चाहतों के नाम मेरी सारी जिंदगानी है
जाने दो छोडो वादा ना तोडो
लगती हो पागल थामो जी आँचल
देखो करो ना मुझसे ऐसी खता

ये इश्क है क्या इक रोग बुरा
ये इश्क है क्या इक रोग बुरा
ना भूख लगे ना प्यास लगे
कोई दर्द हो सह लेना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
किसी को दिल नैय्यो देना
........................................................................
Ye ishq hai kya-Gopi Kishan 1994

Artists: Sunil Sheety, Karishma Kapoor

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November 21, 2017

खो गया जाने कहाँ-मोहर १९५९

हेमंत कुमार ने कई संगीतकारों के लिए गीत गाये. वे एक
ऐसे संगीतकार थे जिनसे शायद ही कोई संगीतकार होगा
उस काले पीले(श्वेत श्याम) युग का जिसने गीत ना गवाना
चाहा होगा. उनका योगदान हिंदी और बंगाली सिनेमा दोनों
के लिए अमूल्य है.

मदन मोहन ने फिल्म मोहर के गीत के लिए एक ऐसी धुन
बनाई जो विशेष रूप से हेमंत कुमार के लिए बनाई सी प्रतीत
होती है. यह राजेंद्र कृष्ण का लिखा गीत है.



गीत के बोल:

आ आ आ आ आ

खो गया जाने कहाँ आरज़ूओं का जहाँ
खो गया जाने कहाँ आरज़ूओं का जहाँ
मुद्दतें गुज़री मगर याद है वो दास्ताँ
खो गया जाने कहाँ आरज़ूओं का जहाँ

दाग़ मिट सकते नहीं दिल से तेरी याद के
इस तरह भूले कोई गुज़रे बहारों का समा
खो गया जाने कहाँ आरज़ूओं का जहाँ
खो गया जाने कहाँ

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
ज़िंदगी वीरान है एक सेहरा की तरह
ज़िंदगी वीरान है एक सेहरा की तरह
दिल मेरा बेताब है मौज-ए-दरिया की तरह
दिल मेरा बेताब है मौज-ए-दरिया की तरह
ग़म की मैं तसवीर हूँ आ आ आ आ
ग़म की मैं तसवीर हूँ बेकसी की दास्ताँ

खो गया जाने कहाँ आरज़ूओं का जहाँ
खो गया जाने कहाँ

क़ाफ़िले आते रहे क़ाफ़िले जाते रहे
मेरी मंज़िल का मगर ना मिला मुझको निशान

खो गया जाने कहाँ आरज़ूओं का जहाँ
मुद्दतें गुज़री मगर याद है वो दास्ताँ
खो गया जाने कहाँ
………………………………………………
Kho gaya jaane kahan-Mohar 1959

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November 20, 2017

आ प्यार के रंग भरें-जीना तेरी गली में १९९१

सन १९९१ की चर्चित फिल्म है जीना तेरी गली में जिसके
गीत काफी बजे थे. इस फिल्म से अगला गीत सुनते हैं
अनुराधा पौडवाल और मोहम्मद अज़ीज़ का गाया हुआ.
रवींद्र रावल की ये रचना है और बाबुल बोस का संगीत.

फिल्म की स्टारकास्ट कुछ इस तरह है-सूरज, कविता कपूर,
अमिता नागिया, अर्चना पूरण सिंह, शम्मी और कुनिका.
फिल्म के निर्माण टी सीरीज़ ने किया और निर्देशन का काम
टीनू आनंद ने किया.



   
गीत के बोल:

आ प्यार के रंग भरें प्यारे अल्फ़ाज़ों में
आ प्यार के रंग भरें प्यारे अल्फ़ाज़ों में
यूं सुनें हम दिल की बातें
यूं सुनें हम दिल की बातें अपनी आवाज़ों में
आ प्यार के रंग भरें प्यारे अल्फ़ाज़ों में
आ प्यार के रंग भरें प्यारे अल्फ़ाज़ों में
यूं सुनें हम दिल की बातें
यूं सुनें हम दिल की बातें अपनी आवाज़ों में
आ प्यार के रंग भरें प्यारे अल्फ़ाज़ों में

जिसने दिल धड़काया उस पल को हम याद करें
उस पल की यादों से नगमे हम आबाद करें
संगीत नया जागा हो
संगीत नया जागा धड़कन के इन साज़ों में

आ प्यार के रंग भरें प्यारे अल्फ़ाज़ों में
यूं सुनें हम दिल की बातें
हो यूं सुनें हम दिल की बातें अपनी आवाज़ों में
आ प्यार के रंग भरें प्यारे अल्फ़ाज़ों में

मिलना और बिछुड़ना इस जीवन की रीत रही
कितने रूप बदले मन में लेकिन प्रीत रही
हैं रंग वफ़ाओं के
हैं रंग वफ़ाओं के अपने इन अन्दाज़ों में

आ प्यार के रंग भरें प्यारे अल्फ़ाज़ों में
यूं सुनें हम दिल की बातें
हो यूं सुनें हम दिल की बातें अपनी आवाज़ों में
आ प्यार के रंग भरें प्यारे अल्फ़ाज़ों में
………………………………………………………..
Aa pyar ke rang bharen-Jeena teri gali mein 1991

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